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राम के पड़ोसी है रहिम

Posted On: 22 Oct, 2010 Others में

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आधुनिक से अत्याधुनिक होते इस दौर में भाईयों के बीच जमीन का बंटवारा होना कोई बड़ी बात नहीं है। आज बंटवारा किस-किस वस्तु को लेकर नहीं होता। समझदारी इसी में है कि पिता और भाई छोटी मोटी मनमुटाव के साथ-साथ आपसी सहमति से जीना सीख लें। परिवार में किसी भी तरह का मनमुटाव हो लेकिन एक बात तो तय है कि वह परिवार गांव या शहर की किसी नुक्कड़ पर एक होता नजर आऐगा। अपने परिवार के बीच कितना ही झगड़ हो फिर भी किसी न किसी तरह भाई के बच्चे अपने ताऊ को राम-राम कर देते है और चाची के हाथ की बनी खीर खा कर कह देते है कि मजा आ गया। जब जमीन का बंटवारा हुआ था तब यह करार नहीं किया गया था कि भाई का लड़का अपने ताऊ को राम-राम करेगा। उस वक्त तो कतरे-कतरे के लिए सोचा जा रहा था।

इन सब बातों से एक बात तो स्पष्ट है कि भले ही झगड़े चलते रहे किंतु रिश्ते बचे रहते है। राम-राम से याद आया कि अब राम और रहीम में भी बंटवारा होने लगा है।कितने हिस्से में राम रहेंगे और कितने में रहीम। यानी बंटवारा हिंदुओं में भी होता है और मुस्लमानों में भी। चाहे फैसला पंचायत करें या फिर लखनऊ हाई कोर्ट पीठ। आयोध्या पर फैसले से साफ जाहिर हो गया है कि राम अब कानूनी तौर पर आयोध्या के हकदार है। सेवानिवृत जस्टिस शर्मा ब्रह्माण है। वे ये मानते है कि सारी जमीन राम की है। लेकिन ऐसा हो नहीं सका। ऐसा हो जाता तो पूरी दुनिया राम औरब्रह्मा की होती। मैं राम का मित्र होता। हम में भी बंटवारा होता। तीनों को बरावर की हिस्सेदारियां मिलती। पूरी दुनिया के हिसाब से मुझे कम से कम मेरा मुल्क तो मिल ही जाता। ऐसे में पूरे भारत का मालिक मैं होता और किसी अखबार और चैनल पर राम और ब्रह्मा के साथ मेरा विज्ञापन चल रहा होता। शहर के किसी वड़ी सी नुक्कड़ पर कई बड़े-बड़े हॉर्डिंग्स लगे होते। हॉर्डिंग्स में राम और ब्रह्मा के बीच मैं प्रमोद कुमार खड़ा होता और लिखा होता प्रमोद कुमार के देश में आपका स्वागत है।
आयोध्या के इस फैसले ने बता दिया है कि इतने साल आयोध्या के राज सिंहासन पर बैठे राम गैरकानूनी थे। लेकिन आयोध्या पर लखनऊ पीठ के फैसले ने राम को कानूनी तौर पर रहने का एक और मौका दे दिया। फैसले से साफ जाहिर है कि अब भगवानों की सम्पति में भी बंटवारा होने लगा है। 84 लाख भगवानों में अगर कोई नये भगवान का जन्म होता है तो जन्म का पंजीकरण करवाना अनिवार्य हो जाएगा नहीं तो फिर बंटवारे के वक्त कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ सकते है। खैर जो हुआ ठीक हुआ कम से कम दो भगवान तो पड़ोसी बन गए। यानि राम के पड़ोसी है रहीम।
आयोध्या की विवादित जमीन पर राजनेताओं ने खूब टीआरपी बटोरी है। किसी भी नेता ने अपनी दादागिरि दिखाने में कोई कोर सर नहीं छोड़ी है। नेताओं में किसी ने कहा कि यह जमीन बाबरी मस्जिद की है तो किसी ने कहा कि इस भूमि पर राम का ही अधिकार है है ताकि कल को चुनाव हो तो उनका भरपूर सहयोग मिल सके। यह लड़ाई राम और रहीम की जमीन के बंटवारे की नहीं अपितु भ्रष्ट नेताओं की ज्यादा लग रही थी।
किसी ने इस जमीन पर अस्पताल बनाने की बात कही तो किसी ने कह दिया कि यहां तो विश्वविद्यालय या महाविद्यालय ही बनना चाहिए। लेकिन सेवानिवृत जस्टिस शर्मा कि यह बात कि पुरी जमीन राम कि है, ने मुझे सोचने पर मजबूर कर रखा है। कि मैं आयोध्या को किस नजरिए से देखू। एक पत्रकार के नजरिए से या एक श्रद्वालु के नजरिए से या फिर इतने साल राज करने वाले राम के मित्र के नजरिए से जिसने मुझे पूरा भारत देश दिया है। अगर मैं एक पत्रकार नजरिए से देखू तो हाई कोर्ट लखनऊ पीठ की पीठ थपथपाता हूं और कहता हू कि जितना हक राम का उतना ही रहिम का। क्योकिं मैं आस्तिक हूं और हिन्दू भी। एक श्रद्वालू के अनुसार यह सारी जमीन मेरे राम की होती। उस राम की जिसने आयोघ्या में जन्म लिया और उसी आयोघ्या में 14 साल का बनवास और लंका फतह करके लौटे। राम के मित्र के नजरिए से मैं राम के बारे में बुरा नहीं सोच सकता। हां मामला जमीन का है तो मैं मेरा हिस्सा कभी नहीं छोड़ूगां। ऐसी बात भी नहीं है कि मुझे जमीन के लिए राम से लड़ना पड़े क्योंकि राम इतने दयालू है कि उन्होंने ता लंका पर जीत दर्ज कर भवीषण को ही सोंप दी थी और कहां कि मुझे बड़ा दुख कि मैं आपके लिए कुछ नहीं कर सकता। अगर नहीं भी देंगे तो मैं हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाऊंगा तो कम से कम मेरा मुल्क मेरे हिस्से में आ ही जाएगा।
इन तीनो हालात ने मुझे पागल कर रखा। समझ नहीं आ रहा है किसे अपनाऊं। फिर ख्याल आया कि आज इस दौर में बन्टवारा तो हर किसी में होता है अब भगवान में होने लगा है तो कौन सी बड़ी बात है। समय के अनुसार भगवान भी एडजेस्ट कर लेंगे। आपको टेंशन लेने की जरुरत नहीं। बस जरुरत है आयोघ्या में अमन की।



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35 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vivek के द्वारा
November 13, 2010

सच में प्रमोद जी अब भगवानो को अपने जन्म का पंजी कर्ण करवा लेना चाहिए……….. बधाई………….

    Parmod के द्वारा
    November 18, 2010

    dhanyabad ………

vinod के द्वारा
November 13, 2010

राजनेताओं का ही तो खेल है प्रमोद जी …………….तभी तो यह बंटवारा हुआ है……….. भधाई हो सुंदर केख के लिए…………

    Parmod के द्वारा
    November 18, 2010

    विनोद जी हमें इसी राजनीती को मिटाना होगा……….

POOJA के द्वारा
November 5, 2010

प्रमोद जी दिवाली की आपको बधाई हो ……….. अपने जो राम और रहीम के बारे मैं लिखा है सच में बहुत ही अच्छा लिखा हैं………..बधाई हो………….

    Parmod के द्वारा
    November 18, 2010

    पूजा जी ……आपके कमेंट्स ही हमारा होसला बढ़ाते है………….धन्यवाद ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

Rachna के द्वारा
November 3, 2010

प्रमोद तुमने अचा लिखा इसी तरह लिखते रहो …………..

    parmod के द्वारा
    November 5, 2010

    thanks rachana ji……….. happy diwali……….

bhupinder के द्वारा
November 2, 2010

जस्टिस शर्मा भी बधाई के पात्र है.

    Parmod के द्वारा
    November 2, 2010

    जस्टिस शर्मा सच में काबिल जज है…………..

    parmod के द्वारा
    November 5, 2010

    thank you bhai……….happy diwali……………

sanjeev saini के द्वारा
November 2, 2010

nice sir ji…………….

    Parmod के द्वारा
    November 2, 2010

    thanx……

dpverma के द्वारा
November 2, 2010

अच्छा लेख…पढ़ कर अच्छा लगा………..अपने अपने मन की भड़ास निकली …..बधाई हो ………प्रमोद जी.

    Parmod के द्वारा
    November 2, 2010

    thanx bhai……….

bhupeshgoyal के द्वारा
November 2, 2010

मनन की बात सब्दो में अछि तरह से बयां की है अपने ……………बाधाई हो………………..

    Parmod के द्वारा
    November 2, 2010

    धन्यबाद ………….

surender के द्वारा
November 2, 2010

सर जी सही बात है आयोध्या की विवादित जमीन पर राजनेताओं ने खूब टीआरपी बटोरी है। किसी भी नेता ने अपनी दादागिरि दिखाने में कोई कोर सर नहीं छोड़ी है। नेताओं में किसी ने कहा कि यह जमीन बाबरी मस्जिद की है तो किसी ने कहा कि इस भूमि पर राम का ही अधिकार है है ताकि कल को चुनाव हो तो उनका भरपूर सहयोग मिल सके। यह लड़ाई राम और रहीम की जमीन के बंटवारे की नहीं अपितु भ्रष्ट नेताओं की ज्यादा लग रही थी।

    Parmod के द्वारा
    November 2, 2010

    आल इज टीआरपी भैया ……………..

bhart के द्वारा
November 2, 2010

सच में अयोध्या को अमन की जरुरत है. लेख अच्छा लगा…………इसी तरह लिखते रहे…………अछे लेख के लिए बधाई ……………….

    Parmod के द्वारा
    November 2, 2010

    thank you bhart ji..

vinod के द्वारा
November 2, 2010

सही बात प्रमोद जी , अब भगवानो में बंटवारा कोई बड़ी बात नहीं है. सुंदर लेख के लिए बड़ाई हो…….

    Parmod के द्वारा
    November 2, 2010

    tnx………………

rajkumar के द्वारा
October 29, 2010

parmod ji logo ko ab ram ki janm sthali bhi raas nhi aa rahi hai……..na jane log kyon bhagwano par rajniti kar rahe hai….. apne sahi kha hai ki jab koi naye bhagwaan ka janm hoga unhe apne janm ka panji karan karva lena chahiye taki bantaware ke waqt koi jhagra na ho……..thank…….

    parmod के द्वारा
    October 29, 2010

    धन्यवाद राजकुमार जी

sanjay के द्वारा
October 28, 2010

bahut achi tarah se apne man ki baat ko sabdo main darsaya hai……….. lekh achha laga….

    parmod के द्वारा
    October 29, 2010

    thanks a lot

ravi sankar के द्वारा
October 28, 2010

सुच मैं अयोध्या को अमन की जरुरत है………….

    parmod के द्वारा
    October 29, 2010

    धन्यवाद

ravi kumar के द्वारा
October 28, 2010

क्या बात है परमोद जी,  सुन्दर लेख के लिए बधाई हो

    parmod के द्वारा
    October 29, 2010

    thanks for you

abodhbaalak के द्वारा
October 24, 2010

क्या बात है परमोद जी, बहुत ही सुन्दरता के साथ आपने अपने मन के द्वन्द को शब्दों से सजाया है, सुन्दर लेख के लिए बधाई हो http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    Parmod के द्वारा
    October 24, 2010

    thyaks ji bas man mein ata hai likh deta hun……….kuch logo ko thik lagta kuch ko bakwas…….. isi liye mene apne blog ka nam hi rakh क्या ये मेरी बकवास है. ……. कंही वक्त निकाल के ब्लॉग पर visit करना …… http://www.parmodvichaar.blogspot.com

jalal के द्वारा
October 23, 2010

मन की उहापोह को जो आमजन में हैं भलीभांति दर्शाया आपने. बातें सोचनीय हैं.

    Parmod के द्वारा
    October 24, 2010

    thanks


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